B.Ed 1 Year Course : करीब 10 साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर 1 वर्षीय B.Ed कोर्स को शुरू करने की तैयारी तेज हो चुकी है। शिक्षा के क्षेत्र में यह फैसला उन लाखों युवाओं के लिए राहत लेकर आया है, जो शिक्षक बनने का सपना तो देखते थे लेकिन 2 साल के B.Ed कोर्स की लंबी अवधि और ज्यादा फीस के कारण पीछे रह जाते थे। अब हालात बदल रहे हैं और सिर्फ ₹20,000 से ₹30,000 की फीस में B.Ed पूरा कर शिक्षक बनने का रास्ता फिर से खुलने जा रहा है।
क्यों बंद हुआ था 1 वर्षीय B.Ed कोर्स
पहले देश में 1 साल का B.Ed कोर्स काफी लोकप्रिय था, लेकिन शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से इसे बंद कर दिया गया था और 2 वर्षीय B.Ed को अनिवार्य कर दिया गया। उस समय माना गया कि ज्यादा समय देने से ट्रेनिंग बेहतर होगी। लेकिन बीते वर्षों में यह भी साफ हुआ कि लंबी अवधि और ज्यादा खर्च कई योग्य छात्रों को शिक्षक बनने से रोक रहा है। इसी वजह से अब दोबारा 1 वर्षीय B.Ed कोर्स को शुरू करने पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।
अब फिर क्यों शुरू किया जा रहा है 1 वर्षीय B.Ed
नई शिक्षा नीति और शिक्षकों की बढ़ती जरूरत को देखते हुए सरकार और शिक्षा संस्थानों ने यह महसूस किया कि एक वैकल्पिक और किफायती रास्ता जरूरी है। स्कूलों में योग्य प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 1 वर्षीय B.Ed कोर्स उन ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों के लिए फायदेमंद साबित होगा, जो जल्दी शिक्षक बनकर नौकरी करना चाहते हैं।
कम फीस में बड़ा मौका
इस नए 1 वर्षीय B.Ed कोर्स की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम फीस है। जहां 2 साल के B.Ed कोर्स में कुल खर्च ₹1 लाख से ₹2 लाख तक पहुंच जाता है, वहीं अब 1 साल का B.Ed कोर्स ₹20,000 से ₹30,000 के बीच पूरा हो सकेगा। यह फीस सरकारी और मान्यता प्राप्त संस्थानों में लागू होने की संभावना है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा।
1 वर्षीय और 2 वर्षीय B.Ed में क्या अंतर होगा
| बिंदु | 1 वर्षीय B.Ed | 2 वर्षीय B.Ed |
|---|---|---|
| कोर्स अवधि | 1 साल | 2 साल |
| अनुमानित फीस | ₹20,000–₹30,000 | ₹1–₹2 लाख |
| फोकस | तेज और व्यावहारिक प्रशिक्षण | विस्तृत प्रशिक्षण |
| नौकरी की शुरुआत | जल्दी | देर से |
यह साफ है कि जो छात्र जल्दी करियर शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए 1 वर्षीय B.Ed ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है।
कौन कर सकेगा 1 वर्षीय B.Ed कोर्स
इस कोर्स के लिए वही उम्मीदवार पात्र माने जाएंगे जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन या पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरा किया हो। माना जा रहा है कि न्यूनतम अंकों की शर्त भी लागू रहेगी, ताकि शिक्षक बनने वाले उम्मीदवारों की गुणवत्ता बनी रहे। इसके अलावा प्रवेश प्रक्रिया में मेरिट या प्रवेश परीक्षा का प्रावधान भी हो सकता है।
नौकरी के अवसर पहले जैसे ही रहेंगे
एक अहम सवाल यह है कि क्या 1 वर्षीय B.Ed करने के बाद नौकरी के मौके मिलेंगे। इस पर शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मान्यता मिलने के बाद 1 वर्षीय B.Ed डिग्री भी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में मान्य होगी। यानी TET, CTET या राज्य स्तरीय शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में बैठने का मौका पहले की तरह ही मिलेगा।
छात्रों के लिए क्यों है यह फैसला फायदेमंद
यह फैसला उन छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद है जो कम समय और कम खर्च में शिक्षक बनना चाहते हैं। ग्रामीण इलाकों और मध्यम वर्ग के परिवारों से आने वाले युवाओं को अब शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का नया मौका मिलेगा। साथ ही स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी काफी हद तक पूरी हो सकेगी।
निष्कर्ष
करीब एक दशक बाद 1 वर्षीय B.Ed कोर्स की वापसी शिक्षा जगत में बड़ा बदलाव मानी जा रही है। कम फीस, कम समय और जल्दी नौकरी की संभावना इसे युवाओं के लिए आकर्षक बना रही है। अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में देश को बड़ी संख्या में प्रशिक्षित और योग्य शिक्षक मिल सकते हैं। यह फैसला न सिर्फ छात्रों के लिए बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है।
Q1. क्या 1 वर्षीय B.Ed डिग्री मान्य होगी
हां, मान्यता मिलने के बाद यह डिग्री सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में मान्य होगी।
Q2. 1 वर्षीय B.Ed की फीस कितनी होगी
अनुमान है कि फीस ₹20,000 से ₹30,000 के बीच रहेगी।
Q3. क्या इससे शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में बैठ सकते हैं
हां, TET, CTET और राज्य स्तरीय शिक्षक भर्ती में पात्रता मिलेगी।
Q4. क्या 2 वर्षीय B.Ed पूरी तरह खत्म हो जाएगा
नहीं, दोनों विकल्प मौजूद रह सकते हैं और छात्र अपनी सुविधा के अनुसार कोर्स चुन सकेंगे